जब धरा पर आसुरी प्रवृत्तियां बढ जाती है तो युगों युगों से भगवान आते है और आसुरी शक्तियों को संहार करते है: श्री राकेश शास्त्री जी

जब धरा पर आसुरी प्रवृत्तियां बढ जाती है तो युगों युगों से भगवान आते है और आसुरी शक्तियों को संहार करते है: श्री राकेश शास्त्री जी
Posted By: Admin
08-Nov-2019

जब धरा पर आसुरी प्रवृत्तियां बढ जाती है तो युगों युगों से भगवान आते है और आसुरी शक्तियों को संहार करते है...

पटना: श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव, गायत्री मैरैज हाल, बजरंगपुरी, गायघाट पटना में कथा व्यास श्री राकेश शास्त्री जी वृदांवन द्बारा श्रीमद्भागवत कथा तृतीय दिवस पर चौबीस अवतारो के वर्णन करते हुए बतायें धर्म की स्थापना के लिए अधर्म के नाश के लिए भगवान अवतार के रुप में आते है। जब धरा पर आसुरी प्रवृत्तियां बढ जाती है तो युगों युगों से भगवान आते है और आसुरी शक्तियों को संहार करते है। वेदव्यास जी ने सतरह पुराण की रचना की, चारों वेद की रचना करने के वाद उदास थे तो नारदजी ने कहा कि अभी तक भगवान का भक्ति सवरूप की रचना नही की और भागवत की सुक्त दिये तदुपरांत वेदव्यासजी नी श्री मद्भागवत महापुराण की रचना की जो जन जन के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ। इस महोत्सव में आचार्य श्री केशव भारती दास जी (अध्यक्ष, इस्कॉन देहरादून), बनारस से आऐ संम्पूर्ण भागवत महापुराण की पाठ पर आचार्य सुमन पाठक, धनंजय मिश्रा, ब्रह्म बाबा सेवा एवं शोध संस्थान, निरोगधाम अलावलपुर पटना के संस्थापक सह संयोजक संजय कुमार सिंह, भागवत कथा आयोजन समिति में प्रमुख रूप से मनोज सिंह, रमाकांत गिरि, कुन्दन प्रताप सिंह, प्रताप नारायण दास, मुन्ना सिंह, धर्मेंद्र कुमार, नरेश कुमार, सुबोध कुमार सिन्हा, अवधेश कुमार सिन्हा, प्रेम, दिनेश कुमार, संजय कुमार,शशि सिहं, दिलीप कुमार झुन्न, मिथलेश सिन्हा, अमर सिंह, जय प्रकाश पप्पू, देव प्रकाश गिरि, गौतम सिंह महोत्सव में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


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